Friday, November 4, 2016
बेटे को कुर्सी और भाई को सिर्फ तारीफ़
"घुटना पेट की तरफ ही मुड़ता है " सोमवार को चुपचाप से संकेतों में मुलायम ने ये साबित कर दिया. अखिलेश को सत्ता, और शिवपाल को सिर्फ तारीफ़ दे गए, आखिर वही हुआ जो तय सा था. मीडिया, राजनेता, अखिलेश-शिवपाल समर्थक और तमाम ख़बरों को एक तरफ कर मुलायम ने अपनी ही स्क्रिप्ट पर कहानी को पूरा किया. दो दिन से मीडिया और विश्लेषक तमाम रास्ते गिना रहे थे. पार्टी टूट जायेगी, मुलायम खुद मुख्यमंत्री बनेंगे, अखिलेश को पार्टी से हटा दिया जाएगा. अखिलेश बचेंगे तो अमरसिंह की छुट्टी तय है. पर ऐसा कुछ नहीं हुआ, पहलवान रहे मुलायम ने स्कूल में टीचर की नौकरी भी की है. वे दंगल, शिक्षा और राजनीती तीनों में पारंगत हैं. वे किसी भी दंगल को निपटने में सक्षम हैं. मुलायम ने पूरी ज़िन्दगी कभी किसी से सीधे बैर मोल नहीं लिया. वे "वन्स अपॉन अ टाइम" फिल्म के उस संवाद पर यकीं रखते हैं जिसमे कहा जाता है कि -जब बात से मामला निपट सकता है, तो दूसरे रास्ते क्यों अपनाना. मुलायम की पूरी राजनीती संबंधों को बनाये रखने की रही है. वे तोड़ने में नहीं जोड़ने में यकीं रखते हैं. यदि ऐसा नहीं होता तो यादव कुनबे के इतने लोग आज सत्ता का सुख नहीं भोग रहे होते. उदारता से मुलायम ने अपने परिवार और करीबियों को आगे बढ़ाया है. जबकि दूसरे परिवारों में बेटे और बहू के अलावा भाई, चचेरे भाइयों को कोई नहीं पुछंता. पर मुलायम ने अपने चचेरे भाइयों और उनके बच्चों को भी सब दिया. रामगोपाल यादव इसके उदाहरण हैं. वे चचेरे भाई हैं, पर कभी शिवपाल से कम नहीं आंकें गए. बहुतों को तो पता भी नहीं होगा कि रामगोपाल मुलायम के सगे भाई नहीं है.
सोमवार को मुलायम ने मीटिंग में वही किया. उन्होंने अखिलेश को फटकारा, भाई शिवपाल का भी सम्मान बरक़रार रखा. अमरसिंह को दोस्त बताया. पर न अखिलेश को मुख्यमन्त्री पद से हटाने के संकेत दिए, न शिवपाल के अधिकारों में कटौती की बात कही. यानी सिर्फ फटकार और सुलह पर ही मुलायम ने जोर दिया. मुलायम को करीब से जानने वालों को यकीं था कि मुलायम कोई कड़ा फैसला नहीं लेंगे. वे सुलह में यकीं रखते हैं, और उन्होंने वही किया. भाई शिवपाल की खूब तारीफ की, उन्हें पार्टी के लिए खून पसीना, बहाने वाला बताया. अखिलेश को बोले तुमको क्या पता है, पार्टी कैसे चलती है. पर शिवपाल के हाथ सिर्फ तारीफ और अमरसिंह और मुख़्तार अंसारी ही आये. सत्ता और उसका भविष्य तो वे बेटे अखिलेश को ही दे गए. उन्होंने पूरे समाजवादी कुनबे को बता दिया की अखिलेश ही मुख्यमंत्री हैं, और रहेंगे, साफ़ इशारा है कि सारे नेता कार्यकर्ता किसी मुगालते में न रहें. यही मुलायम का महीन अंदाज़ है.
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